ॐ जय गंगे माता (गंगा आरती)
Om Jai Gange Mata (Ganga Aarti)
मोक्षदायिनी पुण्यसलिला माँ गंगा की पावन आरती का नित्य श्रवण व गायन जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय कर चित्त को निर्मल और शांत करता है।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता...
चन्द्रसी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥ ॐ जय गंगे माता...
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥ ॐ जय गंगे माता...
एक ही बार जो नर, तेरी शरण आता।
यम की त्रास मिटाकर, परम पद पाता॥ ॐ जय गंगे माता...
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित गाता।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥ ॐ जय गंगे माता...
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हे पतितपाविनी माँ गंगे! आपकी निर्मल जलधारा में डुबकी लगाने मात्र से पापों का शमन हो जाता है। आपने राजा सगर के साठ हजार पुत्रों का उद्धार किया। जो भक्त आपकी आरती करता है, वह संसार-सागर से सहज ही तर जाता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ गंगा आरती का क्या महत्व है?
माँ गंगा सनातन संस्कृति में साक्षात मोक्षदायिनी हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश और काशी में संध्या समय गंगा आरती का दर्शन आध्यात्मिक शांति का परम अनुभव कराता है।
❓ गंगा दशहरा पर कौन सी आरती गाई जाती है?
गंगा दशहरा के पावन पर्व पर 'ॐ जय गंगे माता' की आरती का सस्वर गायन विशेष पुण्यकारी माना जाता है।


