Lord Krishna (श्री बाँके बिहारी जी)
🛕 Lord Krishna (श्री बाँके बिहारी जी)

श्री बांके बिहारी जी की आरती

Shri Banke Bihari Ji Ki Aarti

वृंदावन के प्राणधन ठाकुर श्री बांके बिहारी जी की यह परम मधुर एवं चित्ताकर्षक आरती भक्तों को प्रेम-भक्ति के दिव्य रस में सराबोर कर देती है।

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं।

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

आरती गाऊं प्यारे तुमको रिझाऊं,

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

🌸 ॐ 🌸

बाल रूप तेरी मन को भावे,

मुरली मधुर-मधुर धुन गावे।

मनमोहन तेरी छवि पे मैं जाऊं बलिहारी,

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

🌸 ॐ 🌸

माथे मुकुट मुख पे मुरली विराजे,

गल वैजयंती माला साजे।

नित नित तेरे चरणों की धूली मैं पाऊं,

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

🌸 ॐ 🌸

चरण कमल से अमृत बहे,

जो आवे सो सब सुख लहे।

शरण पड़े को तारत स्वामी, मैं भी शरण तिहारी आऊं,

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

🌸 ॐ 🌸

श्री हरिदास के प्यारे तुम हो,

मेरे मोहन जीवन धन हो।

देख युगल छवि नैनन में बसाऊं,

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

🌸 ॐ 🌸

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं।

हे गिरधर तेरी आरती गाऊं॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

हे मेरे परम प्यारे बाँके बिहारी जी! मैं आपके अलौकिक बाल रूप और मनोहर छवि की आरती उतारकर आपको रिझाना चाहता हूँ। आपके मस्तक पर मोरमुकुट और होठों पर अमृतमयी मुरली विराजित है। स्वामी हरिदास जी के लाडले प्रभु, आपकी युगल छवि को मैं सदा अपने नेत्रों और हृदय में बसाए रखूँ।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ बाँके बिहारी जी की आरती का गायन कब किया जाता है?

वृंदावन मंदिर में प्रातः शृंगार आरती एवं संध्या के समय शयन आरती के अवसर पर यह आरती परम श्रद्धा और प्रेमपूर्वक गाई जाती है।

❓ इस आरती के रचयिता कौन हैं?

यह आरती संगीत सम्राट स्वामी हरिदास जी की प्रेमभक्ति परंपरा से जुड़ी है, जिसमें ठाकुर जी के बाल रूप और दिव्य लीला का गुणगान है।