माँ बगलामुखी की आरती
Maa Baglamukhi Ki Aarti
दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) की यह आरती शत्रुओं के स्तम्भन, वाक् सिद्धि, न्यायालयीय विजय और घोर संकट निवारण के लिए अचूक है।
जय जय श्री बगलामुखी माता, पीताम्बर धारी सुखदाता॥
शत्रु नाशिनी दुःख भंजिनी, जय कल्याणी त्रिकाल दर्शनी॥ जय जय श्री बगलामुखी...
पीत वसन पीताम्बर सोहे, पीत पुष्प मन सबको मोहे।
स्वर्ण सिंहासन विराजत माई, गदा हस्त शत्रु थराई॥ जय जय श्री बगलामुखी...
जिह्वा खींच असुर संहारे, भक्त जनों के काज सुधारे।
ब्रह्म शक्ति तुम त्रिभुवन ध्यावे, जो सुमरे सो सब सुख पावे॥ जय जय श्री बगलामुखी...
कोर्ट कचहरी वाद विवादी, स्तम्भित करत दुष्ट जन वादी।
रोग शोक सब दूर हटावे, भय संशय पल माहिं मिटावे॥ जय जय श्री बगलामुखी...
हल्दी अक्षत दीप संजोई, जो नर आरती गावत कोई।
ताके घर आनंद घनेरा, कृपा करे माँ साँझ-सवेरा॥ जय जय श्री बगलामुखी...
जय जय श्री बगलामुखी माता, पीताम्बर धारी सुखदाता॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
शत्रुओं की वाणी और बुद्धि का स्तम्भन करने वाली पीताम्बरा माँ बगलामुखी के चरणों में प्रणाम। माँ ने असुर की जिह्वा खींचकर धर्म की रक्षा की थी। माँ की आरती करने से विरोधी परास्त होते हैं और भक्त निर्भय होकर धर्ममार्ग पर अग्रसर होता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ माँ बगलामुखी की पूजा में किस रंग का विशेष महत्व है?
माँ बगलामुखी को पीला रंग अति प्रिय है। पीले वस्त्र, पीला आसन, हल्दी, पीले पुष्प और बेसन के लड्डू से पूजन किया जाता है।
❓ बगलामुखी साधना का क्या मुख्य फल है?
शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में न्याय, वाक् सिद्धि और जीवन के गंभीर संकटों का निवारण होता है।


